Bharat ke Sanvidhan Nirman ki Prakriya ko Samjhaie

Bharat ke Sanvidhan Nirman ki Prakriya: भारतीय संविधान को तैयार करने की प्रक्रिया भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह प्रक्रिया 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन में पूरी हुई, और इसका परिणाम 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने के रूप में देखा गया। भारत का संविधान, जो विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, हमारे देश के लोकतांत्रिक और कानूनी ढांचे की नींव है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

Bharat ke Sanvidhan Nirman ki Prakriya: एक ऐतिहासिक प्रक्रिया

Bharat ke Sanvidhan Nirman ki Prakriya ko Samjhaie

संविधान सभा का गठन:
भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया गया था। इस सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत हुआ था। संविधान सभा के कुल 389 सदस्य थे, जिसमें 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों से, 93 सदस्य देशी रियासतों से और 4 सदस्य चीफ कमिश्नर प्रांतों से चुने गए थे।

प्रथम बैठक:
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को दिल्ली में हुई। सच्चिदानंद सिन्हा ने इसकी अध्यक्षता की। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया।

मसौदा समिति और डॉ. बी.आर. अंबेडकर:
डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में मसौदा समिति ने संविधान का प्रारूप तैयार किया। इस समिति ने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन किया और उनके महत्वपूर्ण प्रावधानों को अपनाया।

संविधान निर्माण के चरण

  1. उद्देश्य प्रस्ताव:
    13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों को निर्धारित करता है।
  2. ड्राफ्ट तैयार करना:
    अक्टूबर 1947 में, संविधान का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया गया। इसे मसौदा समिति के सुझावों के आधार पर संशोधित किया गया।
  3. बहस और विचार-विमर्श:
    संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तार से चर्चा की गई। संविधान सभा में कुल 11 सत्र हुए, और इस प्रक्रिया में 2 साल से अधिक का समय लगा।
  4. अंतिम अंगीकरण:
    26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अंगीकार किया। इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जो अब भारत का गणतंत्र दिवस है।

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

  • लिखित संविधान:
    भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
  • 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां (मूल रूप में):
    वर्तमान में इसमें 25 भाग, 470 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं।
  • विदेशी प्रावधानों का समावेश:
    भारतीय संविधान में विभिन्न देशों के संविधानों से प्रावधान लिए गए हैं। उदाहरण के लिए:
    • मौलिक अधिकार (अमेरिका)
    • संसदीय प्रणाली (ब्रिटेन)
    • नीति निर्देशक सिद्धांत (आयरलैंड)

संविधान निर्माण की चुनौतियां

  • धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता:
    संविधान सभा को भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाना था।
  • देशी रियासतों का एकीकरण:
    विभिन्न रियासतों के प्रतिनिधियों को संविधान सभा में शामिल करना एक जटिल कार्य था।
  • भविष्य की आवश्यकता:
    संविधान को ऐसा बनाया गया जो वर्तमान और भविष्य दोनों की जरूरतों को पूरा कर सके।

निष्कर्ष

“भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया” हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है। यह न केवल भारत की विविधता और समृद्ध विरासत को दर्शाता है बल्कि हमारे देश को एक संगठित और मजबूत गणराज्य बनाने में सहायक भी है। यह प्रक्रिया भारतीय इतिहास में एक अद्वितीय उपलब्धि है, जो आज भी हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

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